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News ID #95 · Status: publish
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दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) पर पहली बार कवच संस्करण 4.0 के सफल संचालन के साथ भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। हैदराबाद डिवीजन के मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड पर 108 किलोमीटर से अधिक मार्ग पर कवच संस्करण 3.2 से संस्करण 4.0 में उन्नयन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। A new boost to rail safety! KAVACH 4.0 now covers 108 Route Kilometres between Malkajgiri and Kamareddi rail section in Telangana enabling safer and seamless train operations across the region.#KAVACH4.0 #RailInfra4Telangana pic.twitter.com/C3JP6FLuid— Ministry of Railways (@RailMinIndia) September 23, 2026 दक्षिण मध्य रेलवे पर 1,465 किलोमीटर के मार्ग पर कवच संस्करण 3.2 के सफल संचालन से प्राप्त अनुभव के आधार पर नवीनतम संस्करण में और भी प्रौद्योगिकीय सुधार शामिल किए गए हैं। कवच 4.0 बेहतर सुरक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, उच्च विश्वसनीयता और सुरक्षित ट्रेन संचालन प्रदान करता है। इसे भारतीय रेलवे में व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना है। भारत के विविध रेलवे नेटवर्क के लिए कवच 4.0 में उन्नत सुरक्षा सुविधाएं कवच वर्जन 4.0 का विकास और परीक्षण किया जा चुका है और अब भारतीय रेलवे द्वारा स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली के रूप में इसका उपयोग किया जा रहा है। नवीनतम संस्करण में भारतीय रेलवे नेटवर्क की विविध प्रचालनगत और प्रौद्योगिकीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण सुधार शामिल किए गए हैं। कवच 4.0 में किए गए प्रमुख सुधारों में निम्नलिखित शामिल हैं: स्थान की सटीकता में वृद्धि, जिससे ट्रेनों की स्थिति का अधिक सटीक निर्धारण संभव हो पाता है। बड़े यार्डों में सिग्नल संबंधी पहलुओं की बेहतर जानकारी से ट्रेन संचालन के दौरान स्थितिजन्य जागरूकता मजबूत होती है। बेहतर संचार और सिस्टम एकीकरण के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) के माध्यम से स्टेशन-से-स्टेशन कवच इंटरफेस। वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधा इंटरफेस, जिससे मौजूदा सिग्नलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बेहतर एकीकरण संभव हो पाता है। इन सुधारों से कवच 4.0 देश की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रौद्योगिकी में एक महत्वपूर्ण प्रगति बन गई है और भारतीय रेल में इसके व्यापक स्तर पर उपयोग के लिए एक मजबूत प्रौद्योगिकीय आधार प्रदान करती है। स्वदेशी रूप से विकसित कवच से ट्रेन सुरक्षा में सुधार कवच स्वदेशी रूप से विकसित एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है जिसे प्रचालनगत सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली लोको पायलट को ट्रेनों को निर्धारित गति सीमा के भीतर रखने में सहायता करती है और यदि लोको पायलट ऐसा करने में विफल रहता है तो आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकती है। कवच को खतरे की स्थिति में सिग्नल पार करने (एसपीएडी) से बचाव, गंभीर परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करने और टक्करों के जोखिम को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली खराब मौसम की स्थिति में भी सुरक्षित ट्रेन संचालन में सहायक है। एक अत्यधिक प्रौद्योगिकी केंद्रित सुरक्षा प्रणाली होने के नाते, कवच को उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रमाणन, सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 (एसआईएल-4) की आवश्यकता होती है। कवच की तैनाती के लिए व्यापक अवसंरचना की आवश्यकता कवच परियोजना के कार्यान्वयन में रेलवे खंडों में कई प्रौद्योगिकीय और संचार घटकों की तैनाती शामिल है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: स्टेशनों और ब्लॉक खंडों पर स्टेशन कवच की संस्थापना। ट्रैक की पूरी लंबाई में आरएफआईडी टैग लगाना। पूरे खंड में दूरसंचार टावरों की संस्थापना। रेलवे ट्रैक के साथ-साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना। भारतीय रेल के प्रचालनगत इंजनों पर लोको कवच की व्यवस्था। दक्षिण मध्य रेलवे पर कवच 4.0 का सफल संचालन स्वदेशी रेलवे सुरक्षा प्रौद्योगिकी को सुदृढ़ करने और भारतीय रेलवे नेटवर्क में उन्नत स्वचालित ट्रेन सुरक्षा क्षमताओं का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। *** पीके/केसी/आरटी/एसकेजे/एसके
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