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News ID #69 · Status: publish
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असम की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत को पीएम स्मृति-चिन्ह ई-नीलामी 2026 के 8वें संस्करण में विशिष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है। इसमें राज्य की प्रसिद्ध हथकरघा परंपराओं, बांस और बेंत की शिल्पकारी, धातु शिल्प, पारंपरिक कला तथा विरासत वास्तुकला को प्रदर्शित करने वाले विभिन्न स्मृति-चिन्ह शामिल हैं। असम से संबंधित इस संग्रह में ऐसी वस्तुओं को एक साथ प्रस्तुत किया गया है, जो राज्य के दैनिक जीवन से जुड़ी शिल्पकारी के साथ-साथ उसकी गहन सांस्कृतिक स्मृति को भी दर्शाती हैं। पारंपरिक शिल्प और कलाकृतियों के साथ-साथ इस संग्रह में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक हस्तियों, सांस्कृतिक संस्थानों तथा असम के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़े स्मृति-चिन्ह भी शामिल हैं। ये स्मृति-चिन्ह उन कौशलों, परंपराओं और सांस्कृतिक प्रथाओं की झलक प्रस्तुत करते हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं और आज भी असम की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस संग्रह में असम की विरासत और सांस्कृतिक संस्थानों को भी दर्शाया गया है। इस प्रकार इसमें राज्य की भौतिक एवं शिल्प परंपराओं को उसकी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत के साथ जोड़ा गया है। उल्लेखनीय स्मृति चिन्हों में बीर चिलाराई, भारत रत्न से सम्मानित लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई, स्वर्गदेव चाओलुंग सुकाफा और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव से संबंधित कलाकृतियां और स्मारक-स्वरूप वस्तुएं शामिल हैं। इस संग्रह में 1894 के पथरुघाट युद्ध का एक प्रस्तुतिकरण भी शामिल है, जो असम के इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय की स्मृति की याद जीवंत करता है। इसके साथ ही बोरदुआ सत्रा तथा स्वाहिद स्मारक क्षेत्र एवं पार्क के प्रस्तुतिकरण भी संग्रह का हिस्सा हैं। असम से संबंधित ये स्मृति-चिन्ह पीएम स्मृति-चिन्ह ई-नीलामी के 8वें संस्करण में पेश किए जा रहे कुल 1,498 स्मृति-चिन्हों के व्यापक संग्रह का हिस्सा हैं। यह ई-नीलामी नागरिकों, संग्राहकर्ताओं, संस्थानों, कॉरपोरेट जगत तथा कला एवं संस्कृति के प्रेमियों को विभिन्न अवसरों पर प्रधानमंत्री को भेंट किए गए स्मृति-चिन्ह को प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। इसके साथ ही नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (एनजीएमए) में एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है, जहां आगंतुक इन स्मृति-चिन्हों को देख सकते हैं और उनके कलात्मक एवं सांस्कृतिक महत्व को समझ सकते हैं। पीएम स्मृति-चिन्ह ई-नीलामी का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (एनजीएमए) के माध्यम से किया जाता है। इस नीलामी से प्राप्त धनराशि नमामी गंगे कार्यक्रम को दान की जाती है, जो गंगा नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए संचालित एक राष्ट्रीय मिशन है। पीएम स्मृति-चिन्ह ई-नीलामी 2026 आधिकारिक पोर्टल https://pmmementos.gov.in/#/ के माध्यम से आयोजित की जा रही है। असम के कुछ प्रमुख योगदानों में निम्नलिखित शामिल हैं: सती साधनी की फ्रेमयुक्त मूगा रेशम कलाकृति - यह कलाकृति चुटिया साम्राज्य की 16वीं शताब्दी की रानी सती साधनी को दर्शाती है। इसे पारंपरिक अहोम खाम शैली में मुगा रेशम पर सुनहरी परिष्कृत फॉयल और जैविक रंगों का उपयोग करके तैयार किया गया है। बांस और बेंत की दीवार घड़ी - प्राकृतिक बांस और बेंत से बनी यह हस्तनिर्मित घड़ी असम की टिकाऊ शिल्पकारी और पारंपरिक कला-कौशल को दर्शाती है। इको-क्राफ्ट गिफ्ट बॉक्स - जलकुंभी की कलात्मक शिल्पकारी - हाथ से बुनी चप्पलें, टोकरियां, प्राकृतिक रेशे से बनी टोपी और एक पेंटिंग का संग्रह, जो यह दर्शाता है कि जलकुंभी को टिकाऊ हस्तशिल्प उत्पादों और कारीगरों के लिए आजीविका के स्रोतों में कैसे परिवर्तित किया जाता है। पारंपरिक असमिया जापी – आकर्षक लाल और नीले पैटर्न से सुसजित पारंपरिक जापी असम की विशिष्ट शिल्प परंपराओं को दर्शाती है। इसका आतिथ्य, सम्मान और सत्कार के साथ लंबे समय से संबंध रहा है। असमिया गमूसा - संग्रह में कई पारंपरिक गमूसे शामिल हैं, जो जटिल लाल और सुनहरे रेग के रूपांकनों तथा पारंपरिक असमिया डिजाइनों के माध्यम से राज्य की प्रसिद्ध हथकरघा विरासत को प्रदर्शित करते हैं। असमिया पीतल की खोराई - संग्रह में कई हस्तनिर्मित पीतल की खोराई शामिल हैं, जो असमिया संस्कृति में आतिथ्य, सम्मान और सत्कार का एक पारंपरिक प्रतीक है और राज्य की विशिष्ट घंटी-धातु शिल्प कौशल को प्रदर्शित करते है। लकड़ी से निर्मित कामाख्या मंदिर की प्रतिकृति - ऐतिहासिक कामाख्या मंदिर की लकड़ी से बनाई गई यह सुंदर लघु प्रतिकृति मंदिर की विशिष्ट स्थापत्य शैली और पारंपरिक डिजाइन तत्वों को साकार करती है। **** पीके/केसी/आरटी/आईएम/एनजे
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