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News ID #112 · Status: publish
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अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले 30 वर्षीय सागर कोडी के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना केवल निजी महत्वाकांक्षा नहीं थी। यह उनके परिवार की आर्थिक सबलता और अपने समुदाय के उत्थान में योगदान का भी साधन था। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले सागर को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में वित्तीय और भौगोलिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था। स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल करने के बाद, उन्होंने यूजीसी-नेट जूनियर रिसर्च फेलोशिप पाने का प्रयास किया, लेकिन वे दो प्रतिशत से भी कम अंकों से चूक गए। सागर ने अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखने की दृढ़ संकल्पता के साथ, विश्वविद्यालय के पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला लिया जहां उन्हे वित्तीय सहायता भी मिली। लेकिन यह सीमित सहायता उनके शोध खर्च पूरा करने और उनके परिवार की आर्थिक मदद के लिए पर्याप्त नहीं थी। परिवार को उनसे उम्मीद थी कि वे स्नातकोत्तर की डिग्री पूरी करने के बाद ही कमाना शुरू कर देंगे और घर में आर्थिक योगदान देंगे। इन परिस्थितियों में सागर के लिए डॉक्टरेट शोध कार्य जारी रखना लगातार कठिन होता जा रहा था। तभी अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दी जाने वाली राष्ट्रीय छात्रवृत्ति उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उन्हें 27 दिसंबर 2019 से 15 मई 2024 तक जूनियर रिसर्च फेलोशिप और सीनियर रिसर्च फेलोशिप दोनों के माध्यम से सहायता मिली। उन्हे मिलने वाली अंतिम फेलोशिप सहायता राशि 42 हजार रुपये थी। इस फैलोशिप की मदद से सागर आर्थिक अनिश्चितता से मुक्त होकर पीएचडी की पढ़ाई जारी रख सके। इससे उन्हें शैक्षणिक और शोध खर्चों के साथ ही परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिली। उनके अनुसार, इस फेलोशिप योजना के तहत मिलने वाली सहायता के बिना, उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नही थी कि वे डॉक्टरेट की पढ़ाई जारी रख पाते । दृढ़ संकल्प और संस्थागत सहयोग से सागर ने पीएचडी पूरी की और शोध के क्षेत्र में अपना करियर स्थापित किया। अभी वे भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण, मैसूरु में लेवल 6 के अंतर्गत 37,600 रुपये के मूल वेतन पर रिसर्च एसोसिएट के तौर पर कार्यरत हैं। सागर की कहानी दर्शाती है कि लक्षित छात्रवृत्ति सहायता वंचित समुदायों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को वित्तीय और भौगोलिक बाधाएं दूर कर, उच्च शिक्षा प्राप्त करने और सार्थक करियर बनाने में सक्षम बना सकती है। सागर की इस उपलब्धि से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उन्हें अपने समुदाय के अन्य लोगों को प्रेरित करने और समर्थन देने का अवसर मिला है। अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सागर कोडी ने कहा कि एनएफएससी फैलोशिप ने बिना किसी वित्तीय कठिनाई के उन्हें पीएचडी करने में सक्षम बनाया और शैक्षणिक लक्ष्यों की दिशा में काम करते हुए परिवार के भरण-पोषण में मदद की। सागर कोडी की कहानी दृढ़ता, आकांक्षा और सशक्तिकरण की कहानी है। यह एक ऐसी यात्रा रही जो गांव से शुरू होकर शोध और शिक्षण के क्षेत्र में आशाजनक करियर की ओर बढ़ी। **** पीके/केसी/आरटी/एकेवी/केएस
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