← Review Queue
News Editor
News ID #109 · Status: publish
🔗 Original Source खोलें
Headline
State
Station / City
Reporter / Source
News Body
भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज, 23 सितंबर, 2026 को वड़ोदरा, गुजरात में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के 75वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 75 वर्षों से यह विश्वविद्यालय ज्ञान की अनेक धाराओं को एक साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में किसी समस्या का समाधान अध्ययन की एक धारा तक सीमित नहीं है। आज की सभी महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। हमें वैज्ञानिक की जिज्ञासा चाहिए, कलाकार की संवेदना चाहिए, इतिहासकार की दृष्टि चाहिए, अर्थशास्त्री की समझ चाहिए और समाजशास्त्री की चेतना चाहिए। महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों से यह अपेक्षा की जाती है कि इस दिशा में वे निरंतर गतिशील रहेंगे। राष्ट्रपति ने उपाधियां प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी शिक्षा और ज्ञान के उद्देश्य के बारे में सोचें। उन्होंने कहा कि जब वे अपने कार्यक्षेत्र में राष्ट्र और समाज के हित को सर्वोपरि रख कर आगे बढ़ेंगे तब देश और समाज के साथ-साथ उनकी भी प्रगति होगी, और उस प्रगति से उन्हें असीम संतोष मिलेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होगी जब उससे देश और समाज को लाभ पहुंचेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि वे इंजीनियर बन रहे हैं, तो ऐसी तकनीक विकसित करें जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाएं; यदि वे चिकित्सक बन रहे हैं, तो चिकित्सा को केवल पेशा नहीं, सेवा मानें; यदि वे वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर रहे हैं, तो मानवता के हित में समस्याओं का समाधान निकालें; यदि वे कलाकार या साहित्यकार हैं, तो वे अपनी कला से समाज की संवेदनशीलता को समृद्ध करें; यदि वे उद्यमी बन रहे हैं, तो वे केवल धन नहीं, रोजगार और अवसर का भी सृजन करें; यदि वे शिक्षक बनाना चाहते हैं, तो वे ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करने पर बल दें जो विरासत और विकास को साथ लेकर चले और यदि वे सार्वजनिक जीवन में जा रहे हैं, तो पद को अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व समझें। राष्ट्रपति ने कहा कि हम वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के राष्ट्रीय लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं - एक ऐसा देश जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सभी तक पहुंचे; जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग मानव-कल्याण के लिए हो; जहां अवसरों की समानता हो; जहां महिलाओं और युवाओं की पूरी क्षमता का उपयोग हो और एक ऐसा भारत जहां प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में विश्वविद्यालयों और युवाओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें **** MJPS/SS/PRK
💾 Save Review
✓ Publish
✕ Reject