भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र एक नए और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहा है। बड़े पैमाने पर निवेश आ रहे हैं, विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार हो रहा है और वैश्विक कंपनियाँ भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं। इसके साथ ही, इकोसिस्‍टम अभूतपूर्व गति से विकसित हो रहा है। जैसे-जैसे उद्योग का विस्तार हो रहा है, उद्योग जगत के नेता अलग-अलग क्षेत्रों की क्षमताओं को एक सामूहिक राष्ट्रीय क्षमता में बदलने के लिए उद्योग निकायों के बीच अधिक मजबूत और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। उद्योग जगत के नेताओं की ओर से उभरता एक प्रमुख संदेश यह है कि विकास के अगले चरण को किसी एक क्षेत्र के दम पर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, कलपुर्जे, सामग्री, डिजाइन, पैकेजिंग और अंतिम-उपयोग वाले अनुप्रयोग एक-दूसरे पर लगातार अधिक निर्भर होते जा रहे हैं। इसलिए, सफलता केवल तकनीकी क्षमताओं और बुनियादी ढाँचे पर ही निर्भर नहीं करेगी, बल्कि उद्योग की मिलकर काम करने की क्षमता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सहयोग की यही भावना सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान आयोजित “भारत के राष्ट्रीय एजेंडे को आगे बढ़ाने में उद्योग संघों की भूमिका” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा के केन्‍द्र में रही। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के सीईओ श्री अमितेश कुमार सिन्हा द्वारा संचालित इस सत्र में प्रमुख उद्योग संघों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया और इस बात पर चर्चा की कि गहन सहयोग भारत की सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स संबंधी महत्वाकांक्षाओं को गति देने में किस प्रकार मदद कर सकता है। चर्चा में इस बात पर बढ़ती सहमति दिखाई दी कि उद्योग को अधिक समन्वित “संपूर्ण उद्योग” दृष्टिकोण की ओर बढ़ना चाहिए। प्रतिभागियों ने कहा कि यद्यपि विभिन्न उद्योग संघ इकोसिस्‍टम के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन अंततः उनका साझा उद्देश्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र का निर्माण करना है। चर्चा के दौरान बार-बार उभरकर सामने आया एक प्रमुख विषय विभिन्न प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के बीच बढ़ता अभिसरण था। आज चिप्स का मूल्य केवल अपने आप में नहीं, बल्कि उपकरणों, उत्पादों और प्रणालियों के साथ उनके एकीकरण के माध्यम से सृजित होता है। फैब्रिकेशन में प्रगति के लिए सहायक सामग्रियों और उपकरणों की आवश्यकता होती है, जबकि विनिर्माण पैकेजिंग, टेस्टिंग और व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमताओं पर निर्भर करता है। उद्योग की यह परस्पर संबद्ध प्रकृति संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में अधिक मजबूत संपर्क और अधिक सुव्यवस्थित सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती है। चर्चा का एक अन्य महत्वपूर्ण विषय यह था कि व्यक्तिगत सम्मेलनों और आयोजनों से आगे भी इस सहभागिता को बनाए रखने की आवश्यकता है। उद्योग जगत के नेताओं ने एक अधिक स्थायी सामुदायिक तंत्र स्थापित करने के विचार पर विचार-विमर्श किया, जो निरंतर संवाद को सुगम बना सके, विभिन्न संघों के बीच समन्वय को प्रोत्साहित कर सके और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सामूहिक कार्रवाई को आगे बढ़ाने में सहायता कर सके। इस प्रस्ताव का उद्देश्य मौजूदा संघों की विशिष्ट भूमिकाओं को प्रतिस्थापित करना नहीं है। इसके बजाय, इसका उद्देश्य उनकी क्षमताओं और अनुभवों के आधार पर एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, जहाँ वे विभिन्न क्षेत्रों और मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़े साझा मुद्दों पर सहयोग कर सकें। जैसे-जैसे भारत की महत्वाकांक्षाएँ विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना से आगे बढ़कर एक व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्‍टम के निर्माण की दिशा में विकसित हो रही हैं, ऐसे संस्थागत सहयोग को रणनीतिक आवश्यकता के रूप में तेजी से देखा जा रहा है। इस चर्चा ने व्यापक “सिलिकॉन से सिस्टम तक” के दृष्टिकोण को और मजबूत किया, जिसमें डिजाइन, विनिर्माण, पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी समाधान एक साथ मिलकर अधिक मजबूत और अधिक लचीले इकोसिस्‍टम का निर्माण करते हैं। जैसे-जैसे भारत अपनी सेमीकंडक्टर संबंधी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ा रहा है, उद्योग जगत के नेताओं के अनुसार, विकास के अगले चरण को आकार देने में पूंजी निवेश और बुनियादी ढाँचे के विकास के रूप में सहयोग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इस गति को समर्थन प्रदान करते हुए, सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया, जिनमें लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ शामिल थीं। इन प्रदर्शकों ने भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्‍टम में बढ़ती वैश्विक रुचि को प्रदर्शित किया। इस आयोजन के दौरान विनिर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), लॉजिस्टिक्स और कौशल विकास के क्षेत्रों में 56 समझौता ज्ञापनों (एमओयू), रणनीतिक पहलों और उद्योग संबंधी घोषणाएं की गई। सरकारी सहयोग इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी पहलों के माध्यम से घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और एक सुदृढ़ विनिर्माण इकोसिस्‍टम के निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें से सितम्‍बर 2026 तक पाँच वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर इकाइयाँ पहले ही परिचालन में आ चुकी हैं। सामूहिक रूप से, ये घटनाक्रम एक व्यापक वास्तविकता को रेखांकित करते हैं: भारत की सेमीकंडक्टर गाथा अब केवल कारखाने स्थापित करने तक सीमित नहीं है। यह तेजी से उद्योगों, संस्थानों और प्रौद्योगिकियों के बीच संपर्क स्थापित करने पर केन्‍द्रित हो रही है, जिसमें सहयोग देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र की विकास यात्रा के अगले चरण की आधारशिला के रूप में उभर रहा है। पैनल में एसईएमआई के सीईओ एवं अध्यक्ष श्री अजीत मनोचा; आईसीईए के अध्यक्ष श्री पंकज महिंद्रू; ईएलसीआईएनए के महानिदेशक श्री राजू गोयल; एमएआईटी के महानिदेशक कर्नल सुहैल जैदी; तथा एसईएमआई इंडिया के अध्यक्ष श्री अशोक चंडक शामिल थे। हिंदी PDF फ़ाइल के लिए यहाँ क्लिक करें ****** पीके/केसी/केपी