एनएचआरसी, भारत ने नई दिल्ली में वैधानिक पूर्ण आयोग बैठक आयोजित की
Reporter: PIB Hindi
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत ने आज नई दिल्ली में आयोग के सभी सात 'मानित सदस्यों' के प्रतिनिधियों के साथ वैधानिक पूर्ण आयोग बैठक आयोजित की। इस बैठक का उद्देश्य मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा के लिए आयोगों के बीच तालमेल और सहयोग को बेहतर बनाना था।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए, एनएचआरसी, भारत के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री वी. रामासुब्रमण्यन ने आयोगों के बीच समन्वय के साथ काम करने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी राष्ट्रीय आयोगों के अध्यक्ष एनएचआरसी के पदेन सदस्य होते हैं और इसलिए वे इसका हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि आयोग साथ मिलकर समाज के विभिन्न वर्गों के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए सार्थक काम कर सकते हैं।
न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यन ने सभी राष्ट्रीय आयोगों के बीच तालमेल बिठाने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अगर मामलों की जांच के लिए किसी आयोग के पास जरूरी संसाधन या व्यवस्था नहीं है, तो एनएचआरसी उन्हें मदद देने पर विचार कर सकता है। अपनी समापन टिप्पणी में, उन्होंने भीख मांगने वाली मानसिक रूप से बीमार महिलाओं के पुनर्वास के उपायों की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि इस पर ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में दिव्यांगजनों (पीडब्लूडी) की एक बड़ी आबादी है और उनके कल्याण के लिए बनी नीतियों की समीक्षा करने और इनकी कमियों की पहचान करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। एनएचआरसी, भारत के अध्यक्ष ने दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक सुरक्षा की कमी और बीमा कंपनियों द्वारा बीमा कवरेज न दिए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने आपसी विश्वास और सहयोग बढ़ाने के लिए अलग-अलग धर्मों के बीच बातचीत और साथ मिलकर शोध करने के सुझाव की भी सराहना की, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ काम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जैसे कि कमजोर और वंचित समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक एकीकृत रणनीति अपनाना, सहयोग आधारित प्रयासों के लिए मुख्य क्षेत्रों की पहचान करना, अच्छे तरीकों को साझा करना और मामलों के दोहराव को कम करना। प्रतिभागियों ने तथ्यों की संयुक्त जांच करने, शोध करने, जागरूकता अभियान चलाने और लोगों तक पहुँचने वाले कार्यक्रम आयोजित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्लू) की अध्यक्ष श्रीमती विजया के. रहाटकर ने महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा के लिए एनसीडब्लू के कामों और अलग-अलग जिलों में उनकी शिकायतें सुनने के लिए आयोजित जन-सुनवाई जैसे कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिकायतें सुनने के अलावा, एनसीडब्लू महिलाओं के कल्याण के लिए शोध, जागरूकता और आउटरीच प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी विशेष ध्यान देता है। उन्होंने आगे कहा कि एनसीडब्लू केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ मिलकर मानव तस्करी के खिलाफ अभियान चला रहा है और अलग-अलग संस्थानों के साथ मिलकर युवाओं के साथ पीओएसएच, पॉक्सो और साइबर अपराध से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर रहा है।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) की सदस्य श्रीमती किरण उमेश महाले ने भिक्षुक समुदाय, खासकर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों की परेशानियों के बारे में बात की। उन्होंने मानसिक रूप से बीमार महिलाओं को उनके परिवारों द्वारा सड़कों पर भीख मांगने के लिए छोड़ दिए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय आयोग उनके पुनर्वास के लिए नीति बनाने और सरकार से उसे लागू करने की सिफारिश करने पर विचार कर सकते हैं।
दिव्यांगजन आयुक्त (सीसीपीडी) श्री एस. गोविंदराज ने कहा कि सीसीपीडी उन लोगों तक पहुंचने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिन तक अभी तक नहीं पहुंचा गया है। उन्होंने दिव्यांगजनों के कल्याणकारी उपायों में मौजूद कमियों पर शोध करने की आवश्यकता पर जोर दिया; उन्होंने दिव्यांगजनों को भेदभाव का सामना करने वाले सबसे कमजोर वर्गों में से एक बताया।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के सदस्य सचिव डॉ. संजीव शर्मा ने अभियान के तौर पर बच्चों के बचाव और पुनर्वास के लिए एनसीपीसीआर के काम पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 8,000 से अधिक बच्चों को बचाया गया है और उनका पुनर्वास किया गया है। उन्होंने क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के प्रसार पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने राज्य आयोगों को मजबूत करने के अलावा, वैधानिक आयोग के सदस्यों द्वारा संयुक्त जांच और संयुक्त पीठ बैठकें आयोजित करने का सुझाव दिया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के सचिव श्री विवेक कुमार देवांगन ने कहा कि एनसीएससी ने ई-शिकायत निगरानी पोर्टल स्थापित किया है, जिससे शिकायतों का तेजी से समाधान हुआ है। उन्होंने वैधानिक आयोग के सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय, क्षमता निर्माण और शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता पर सहयोग, सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर संयुक्त अध्ययन और मापने योग्य लक्ष्यों के साथ संयुक्त कार्य योजनाओं पर जोर दिया।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के सचिव श्री सुचिंद्र मिश्रा ने एनएचआरसी के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक शिकायत निवारण प्रणालियों और क्षमता निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य अल्पसंख्यक आयोगों की स्थापना के लिए राज्यों के साथ समन्वय पर भी जोर दिया और बताया कि अब तक केवल 18 राज्यों में ही ऐसे आयोग हैं। उन्होंने अंतर-धार्मिक संवाद आयोजित करने के अलावा, समन्वित शोध और शिकायत निवारण के महत्व पर भी बल दिया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के उप सचिव श्री मनोहर एन. सुकोले ने 'स्वतः संज्ञान' वाले मामलों को दर्ज करने के महत्व पर ज़ोर दिया। साथ ही, उन्होंने शिकायत निवारण के ऐसे मंच बनाने की ज़रूरत बताई, जिनमें वास्तविक-समय पर निगरानी और शुरुआती चेतावनी की सुविधा हो, ताकि बार-बार होने वाली समस्याओं और एक-दूसरे से जुड़े मामलों की पहचान की जा सके, ताकि वैधानिक आयोग के सदस्य ज्यादा एकीकृत दृष्टिकोण के साथ काम कर सकें।
एनएचआरसी, भारत के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) विद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि कोशिश यह होनी चाहिए कि सभी मिलकर काम करें, ताकि लाभ जमीनी स्तर तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि भले ही वैधानिक आयोग के सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हों, लेकिन उनका मकसद एक ही है। उन्होंने कहा कि मानक संचालन प्रक्रियाएँ तभी प्रभावी हो सकती हैं जब उन्हें ठीक से लागू किया जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सभी आयोगों के पास अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए पर्याप्त स्टाफ और अवसंरचना होनी चाहिए।
एनएचआरसी, भारत की डीजी (जांच) डॉ. अनुपमा नीलेकर चंद्रा ने कहा कि आयोग 30 सितंबर 2026 से हर महीने के आखिरी बुधवार को जांच अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। समय के साथ इसका और विस्तार किया जाएगा।
इससे पहले, बैठक का एजेंडा तय करते हुए एनएचआरसी, भारत के महासचिव श्री पीयूष गोयल ने देश के अनोखे संस्थागत मानवाधिकार संरक्षण व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कमज़ोर और वंचित समुदायों - जिनमें बंधुआ मजदूर, बुजुर्ग और मैला ढोने वाले लोग शामिल हैं - के अधिकारों की रक्षा के लिए अलग-अलग आयोगों के बीच तालमेल और सहयोग बनाने में इन संस्थाओं के बीच संवाद बहुत उपयोगी है। यह बातचीत क्षमता निर्माण और बेहतरीन तौर-तरीकों को साझा करने की दिशा में भी मदद कर सकती है।
एनएचआरसी, भारत के संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार ने पिछले साल आयोग द्वारा की गई गतिविधियों का ब्यौरा दिया।
भारत में मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनके संरक्षण के लिए आयोगों के बीच मिलकर काम करने के नए संकल्प के साथ बैठक का समापन हुआ।
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