एनएसएफडीसी-डब्ल्यूबीएससीडीसी के सहयोग से हरियाली से समृद्धि की ओर
Reporter: PIB Hindi
समय पर प्राप्त संस्थागत सहायता महिलाओं को संगठित होने, स्थायी आजीविका विकसित करने और अपने परिवारों के कल्याण में सुधार करने में मदद कर सकती है। वहीं, किफायती वित्तीय सहायता तक सीमित पहुंच अक्सर ग्रामीण महिलाओं को आय-सृजन संबंधी गतिविधियां शुरू करने और आर्थिक आत्मनिर्भता हासिल करने से रोकती है।
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में 11 सदस्यों वाले स्वयं सहायता समूह ‘मां लक्ष्मी महिला समिति’ ने एनएसएफडीसी की ‘महिला समृद्धि योजना’ के तहत 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त कर हरितगृह (ग्रीनहाउस) खेती के माध्यम से अपनी आजीविका में बदलाव किया। ये ऋण 5 फरवरी 2025 को डब्ल्यूबीएससीडीसी के ज़रिए वितरित किया गया था।
वित्तीय सहायता प्राप्त करने से पहले समूह के सदस्यों के पास आय का कोई नियमित स्रोत नहीं था और वे आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रही थीं। काम करने की इच्छा और तत्परता के बावजूद पूंजीतक सीमित पहुंच के कारण वे आजीविका की कोई स्थाई गतिविधि शुरू नहीं कर पा रही थीं।
समूह के सदस्यों को पश्चिम बंगाल अनुसूचित जाति विकास निगम के ज़िला कार्यालय के माध्यम से इस योजना के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पट्टे पर ली गई भूमि पर हरितगृह (ग्रीनहाउस) खेती करने के लिए वित्तीय सहायता हेतु आवेदन किया। इस ऋण से उन्हें खेती शुरू करने और सामूहिक रूप से आजीविका का एक स्रोत स्थापित करने के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध हुई।
निरंतर प्रयास और आपसी सहयोग के माध्यम से समूह ने सफलतापूर्वक हरितगृह (ग्रीनहाउस) खेती की गतिविधि विकसित की। अब इस ‘स्वयं सहायता समूह’ की प्रत्येक सदस्य लगभग 4,000 रुपये से 8,000 रुपये प्रति माह की आय अर्जित कर रही है। इस अतिरिक्त आय से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हुई हैं।
आज ‘मां लक्ष्मी महिला समिति’ की सदस्याएं अधिक आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ रही हैं। उनकी यात्रा ये दर्शाती है कि समय पर उपलब्ध ऋण और संस्थागत सहायता किस प्रकार ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आजीविका के साधन सृजित करने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस समूह ने समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में उसकी यात्रा में सहयोग देने के लिए एनएसएफडीसी और डब्ल्यूबीएससीडीसी के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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