फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाकर किसान पराली जलाने से बचें :- उपायुक्त सतबीर सिंह
Reporter: हरियाणा जनसंपर्क
फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाकर किसान पराली जलाने से बचें :- उपायुक्त सतबीर सिंह
Posted On:
24 Sep 2026 5:05PM
रोहतक, 24 सितंबर। उपायुक्त सतबीर सिंह ने किसानों से आह्वान किया है कि वे फसल कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों को जलाने की बजाय उनका उचित प्रबंधन करें। फसल अवशेष कोई अपशिष्ट पदार्थ नहीं हैं, बल्कि इनमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर तथा जैविक कार्बन जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में सहायक हैं।सतबीर सिंह ने कहा है कि फसल अवशेष जलाने से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड तथा ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा बढ़ती है। इससे वायु प्रदूषण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, फसल अवशेष जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्म जीव एवं कीट नष्ट होते हैं तथा मिट्टी की जल ग्रहण क्षमता और उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है।उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा है कि फसल कटाई के बाद खेत में हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज मशीन, रोटावेटर, चॉपर, बेलर व रीपर आदि कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों का प्रबंधन किया जा सकता है। खेत में हल या रोटावेटर चलाकर फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और जैविक पदार्थ बढ़ता है। इससे अगली फसल के लिए सिंचाई एवं उर्वरक की आवश्यकता को भी कम किया जा सकता है।सतबीर सिंह ने कहा है कि स्ट्रॉ चॉपर की मदद से फसल अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में मिलाया जा सकता है। जीरो टिलेज मशीन या हैप्पी सीडर के माध्यम से फसल अवशेषों की मौजूदगी में भी अगली फसल की बुवाई की जा सकती है। फसल अवशेषों को खेत के कोने में एकत्र करके पूरी तरह गलने के बाद खाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। थोड़े यूरिया के घोल अथवा गोबर के साथ केंचुओं एवं ट्राइकोडर्मा को मिलाकर फसल अवशेषों के खाद में बदलने की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है।उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा है कि फसल अवशेषों का पशुओं के चारे के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा कागज उद्योग, पैकेजिंग उद्योग, ईंट भ_ों, विद्युत उत्पादन के लिए बायोमास विद्युत संयंत्र, बायोगैस एवं मशरूम उत्पादन सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी फसल अवशेष उपयोगी हैं। बेलर मशीन की सहायता से फसल अवशेषों को बंडल एवं गांठों में तैयार करके आसानी से आवश्यक स्थान तक पहुंचाया जा सकता है।सतबीर सिंह ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आवश्यक मशीनरी उपलब्ध करवाने हेतु समय-समय पर वित्तीय सहायता एवं अनुदान दिया जाता है। कृषि विभाग की ओर से जीरो टिलेज मशीन, हैप्पी सीडर, बेलर, चॉपर, रोटावेटर, रीपर आदि कृषि यंत्रों की खरीद पर निर्धारित योजनाओं के तहत सब्सिडी प्रदान की जाती है।उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा है कि किसान कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर सकते हैं। कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी गांव-गांव जाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इसी कड़ी में जिला के गांव सीसर खास में विभाग द्वारा जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। किसानों को फसल अवशेष न जलाने तथा उपलब्ध कृषि यंत्रों के माध्यम से उनका उचित प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।सतबीर सिंह ने स्पष्ट किया है कि फसल अवशेष जलाना पर्यावरण एवं मिट्टी दोनों के लिए नुकसानदायक है। फसल अवशेष जलाने पर नियमानुसार 2,500 रुपये से 15,000 रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है तथा नियमों के उल्लंघन पर पुलिस कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएं और फसल अवशेषों को खेत की मिट्टी में मिलाकर अथवा अन्य उपयोगी माध्यमों से प्रबंधित कर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें।
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(Release ID: 7196)