पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक के लिए गांव-गांव बढ़ाई जाए निगरानी : उपायुक्त नेहा सिंह
Reporter: हरियाणा जनसंपर्क
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पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक के लिए गांव-गांव बढ़ाई जाए निगरानी : उपायुक्त नेहा सिंह
-मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों के साथ की बैठक, आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे प्रबंधों की हुई समीक्षा
Posted On:
24 Sep 2026 4:54PM
सोनीपत, 24 सितंबर। धान सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी उपायुक्तों के साथ बैठक की। बैठक में पिछले वर्ष हुई पराली जलाने की घटनाओं और दर्ज एफआईआर की समीक्षा करते हुए इस बार आगजनी की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।सभी गांवों में नियुक्त किए गए नोडल अधिकारीवीसी के दौरान उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि जिले के सभी गांवों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव स्तर पर गठित की जाने वाली टीमों में ग्राम सचिव और पटवारी को भी शामिल किया जाए, ताकि पराली जलाने की घटनाओं की प्रभावी निगरानी हो सके और सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उपायुक्त ने बताया कि आगजनी की घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए विभाग द्वारा मोबाइल एप तैयार किया गया है। सभी नोडल अधिकारी इस एप के माध्यम से आगजनी की घटनाओं के फोटो और पूरी रिपोर्ट दर्ज करेंगे। इससे घटनाओं की निगरानी और मौके पर कार्रवाई की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।किसानों को पराली प्रबंधन के लिए किया जाए जागरूकउपायुक्त ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को पराली नहीं जलाने तथा उसके उचित प्रबंधन के लिए जागरूक करें। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा धान के अवशेषों को जलाने के बजाय कृषि यंत्रों की सहायता से मिट्टी में मिलाकर प्रबंधन करने पर 1200 रुपये प्रति एकड़ की अनुदान राशि दी जाती है। उन्होंने कहा कि जो किसान पराली प्रबंधन के लिए कृषि विभाग को आवेदन करेंगे, उन्हें उपलब्धता के अनुसार आवश्यक कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। किसानों को पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के बारे में भी जागरूक किया जाए।पिछले वर्ष आगजनी वाले गांवों पर विशेष नजरउपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन गांवों में पिछले वर्ष पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं और एफआईआर दर्ज हुई थी, उन गांवों में विशेष निगरानी रखी जाए। संबंधित अधिकारी ऐसे गांवों में पहले से ही किसानों से संपर्क करें और उन्हें पराली प्रबंधन के उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दें, ताकि दोबारा आगजनी की घटनाएं न हों। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे धान की पराली को जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ता है। इसलिए किसान पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें।हरसेक की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई के निर्देशउपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसेक) से प्राप्त पराली जलाने एवं अन्य आगजनी से संबंधित रिपोर्ट पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कृषि विभाग के अधिकारी तुरंत कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं में संलिप्त किसानों अथवा अन्य आगजनी की घटनाओं में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पराली जलाने वाले किसानों पर निर्धारित जुर्माने की कार्रवाई के साथ-साथ मेरी फसल मेरा ब्यौरा में रेड एंट्री भी की जाए, ताकि पराली जलाने की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। बैठक में डीडीपीओ मनीष मलिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आरओ अजय सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से सहायक कृषि अभियंता नवीन हुड्डा, एसएमएस राहुल सैनी, मनोज कुमार तथा जेई संदीप मौजूद रहे।
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(Release ID: 7187)