प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संस्कृत का एक सुभाषितम साझा किया है, जिसमें सत्य, मधुर और हितकारी शब्दों के उच्चारण और समाज में शांति एवं सद्भाव का प्रचार-प्रसार करने के लिए वाणी में अनुशासन के अभ्यास के महत्‍व का उल्‍लेख किया गया है। प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा; "अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्। स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥" हमें सदैव सत्य, मधुर और हितकारी वाणी बोलनी चाहिए, जो किसी के मन में अशांति उत्‍पन्‍न न करे। पवित्र सद्ग्रंथों का निरंतर स्‍वाध्‍याय और चिंतन ही वाणी को वास्‍तविक सार्थकता प्रदान करता है। विचारपूर्वक बोली गई वाणी समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का संचार करती है। अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्।स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥ pic.twitter.com/5oVLLlRB73— Narendra Modi (@narendramodi) September 24, 2026 *** पीके/केसी/आरटी/एसएस/वाईबी