आईआईडब्लूडब्लू 2026 के दूसरे दिन जल सुरक्षा, नवार और लचीली वॉश सेवाओं के विभिन्न आयाम एक साथ लाए गए
Reporter: PIB Hindi
9वें इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक (आईआईडब्लूडब्लू 2026) का दूसरा दिन नई दिल्ली के भारत मंडपम में क्लाइमेट-रेसिस्टेंट वाटर मैनेजमें की थीम पर अपने पूर्ण तकनीकी कार्यक्रमों में प्रवेश कर गया। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस दिन के कार्यक्रमों में, देश, जल नेता, प्रैक्टिशनर और थिमैटिक फोरम पर समानांतर चर्चाएँ हुईं, साथ ही विशेष साइड इवेंट और समवर्ती दूसरा अंतर्राष्ट्रीय वॉश सम्मेलन भी आयोजित किया गया।
नीदरलैंड के नेतृत्व में "जल प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और स्रोत के टिकाउपन में सफलता की कहानियाँ" पर आयोजित कंट्री फोरम को संबोधित करते हुए, पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव, श्री अशोक के.के. मीणा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत और नीदरलैंड की यह साझा समझ है कि जल प्रबंधन केवल एक इंजीनियरिंग की चुनौती नहीं है, बल्कि यह शासन, समुदाय और जलवायु-लचीलेपन की भी चुनौती है। उन्होंने उल्लेख किया कि जल जीवन मिशन के तहत भारत के अनुभव ने यह प्रदर्शित किया है कि जल सुरक्षा के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामुदायिक स्वामित्व, वैज्ञानिक योजना, जवाबदेह संस्थान और डिजिटल नवाचार के एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस मिशन का ध्यान बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर अब टिकाउपन, सेवा की गुणवत्ता और दीर्घकालिक जल सुरक्षा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
श्री मीणा ने जलवायु-लचीली और टिकाऊ जल प्रणालियों को आगे बढ़ाने में भारत-नीदरलैंड सहयोग के बढ़ते दायरे पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने 'सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर' और स्रोत स्थिरता के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम जैसी पहलों का हवाला दिया, जो डेटा-संचालित योजना, परिसंपत्ति प्रबंधन और जोखिम-सूचित निर्णय लेने में सहायता करती हैं। स्रोत के टिकाउपन, ग्रेवाटर प्रबंधन और स्थानीय सरकारी स्वामित्व के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने उल्लेख किया कि भारत अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से सहयोग को गहरा करते हुए जल शासन में नीदरलैंड के व्यापक अनुभव से सीखने के लिए उत्सुक है।
डीडीडब्लूएस के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक, सुश्री ऐश्वर्या सिंह की अध्यक्षता में "ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रभावी ग्रेवाटर प्रबंधन" पर आयोजित तकनीकी सत्र में ग्रामीण जल आपूर्ति कवरेज के विस्तार के संदर्भ में ग्रेवाटर प्रबंधन के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस सत्र में देश के विभिन्न हिस्सों जैसे आंध्र प्रदेश, सिक्किम, बिहार, जम्मू-कश्मीर और झारखंड के अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए राज्य मिशन निदेशक, विकास भागीदार, पंचायती राज प्रतिनिधि और जमीनी स्तर के प्रैक्टिशनर एक साथ आए।
अपनी टिप्पणियों में, सुश्री सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रेवाटर प्रबंधन के लिए कोई एक ही समाधान सभी पर लागू नहीं होता है और समाधानों को स्थानीय परिस्थितियों तथा समुदाय की जरूरतों के अनुसार अनुकूलित किया जाना चाहिए। चर्चाओं का केंद्र-बिंदु विकेंद्रीकृत उपचार और रीयूज मॉडल, ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (डीपीडीपी) में ग्रेवाटर प्रबंधन का एकीकरण, और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ जल एवं स्वच्छता परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना था।
दूसरा अंतर्राष्ट्रीय वॉश सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन, (i) वॉश के लिए डिजिटल तकनीक, एआई और नवाचार; (ii) शासन, सामुदायिक सहभागिता और संस्थागत सुदृढ़ीकरण; (iii) जलवायु लचीलापन, प्रकृति-आधारित समाधान और स्वच्छता; (iv) जल की गुणवत्ता, सुरक्षा और उभरते प्रदूषक; (v) वित्त पोषण, आर्थिक मॉडल और तकनीकी-आर्थिक समाधान; तथा (vi) शासन, सामुदायिक सहभागिता और संस्थागत सुदृढ़ीकरण विषयों पर छह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। जलवायु-लचीली और टिकाऊ वॉश सेवाओं को मजबूत करने के लिए अभिनव दृष्टिकोणों, उभरते अनुसंधान और व्यावहारिक समाधानों को प्रदर्शित करते हुए कुल 25 तकनीकी शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
तकनीकी सत्रों का विवरण
पहला तकनीकी सत्र, "वॉश के लिए डिजिटल तकनीक, एआई और नवाचार," जल और स्वच्छता सेवाओं के प्रबंधन, निगरानी और रखरखाव को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर केंद्रित था। चार शोध पत्रों में बिहार में ग्रामीण स्वच्छता के लिए एक डिजिटल संचार और निगरानी प्रणाली, भारी धातु आयनों के ऑन-साइट पता लगाने के लिए कम लागत वाली आईओटी-आधारित प्रणाली, जल-बचत उपकरणों के रूप में स्मार्ट वाटर मीटर, और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के पूर्वानुमानित संचालन और रखरखाव के लिए एआई-संचालित निर्णय समर्थन शामिल थे। प्रस्तुतियों में सेवा निगरानी, दक्षता और परिसंपत्ति प्रबंधन में सुधार के लिए डिजिटल तकनीकों, आईओटी एवं एआई की क्षमता पर प्रकाश डाला गया।
दूसरा तकनीकी सत्र, "शासन, सामुदायिक सहभागिता और संस्थागत सुदृढ़ीकरण," टिकाऊ वॉश सेवाओं के लिए सामुदायिक भागीदारी, समावेशी दृष्टिकोण और संस्थागत सहयोग पर केंद्रित था। चार शोध पत्रों में पीसीएमसी में एक लिंग-समावेशी स्वच्छता मॉडल, 'दस्तक अभियान' के माध्यम से बिहार में ग्रामीण पाइपयुक्त जल सेवाओं के लिए सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल जुड़ाव, असम में 'जल विद्या कार्यक्रम' के माध्यम से वॉश के लिए अंतर-विभागीय सहयोग, और ग्रामीण स्वच्छता के लिए एक सर्विस-लर्निंग ढांचा शामिल थे। इस सत्र में वॉश परिणामों को मजबूत करने में सामुदायिक स्वामित्व, संस्थागत समन्वय और समावेशी दृष्टिकोण की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
तीसरा तकनीकी सत्र, "जलवायु लचीलापन, प्रकृति-आधारित समाधान और स्वच्छता/अन्य," जल, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों में जलवायु लचीलापन और स्थिरता को मजबूत करने के दृष्टिकोणों पर केंद्रित था। चार शोध पत्रों में शहरी जल प्रणालियों में जलवायु अनुकूलन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक लागत प्रभावी जलवायु-लचीला मॉडल, ग्रेवाटर प्रबंधन के लिए सहभागी ग्राम योजना, और जल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए रिमोट से संचालित वाहनों, एआई और सेंसर प्रौद्योगिकियों का अनुप्रयोग शामिल थे। इस सत्र में लचीली वॉश प्रणालियों के निर्माण में जलवायु-उत्तरदायी योजना, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-सक्षम दृष्टिकोणों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
चौथा तकनीकी सत्र, "जल गुणवत्ता, सुरक्षा और उभरते प्रदूषक," जल गुणवत्ता प्रबंधन और जल सुरक्षा को मजबूत करने के दृष्टिकोणों पर केंद्रित था। पांच शोध पत्रों में सुरक्षित, ऊर्जा-स्वतंत्र ग्रामीण हैंडपंप जल आपूर्ति के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण, असम के बोगांव में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल की गुणवत्ता, जलजनित रोगजनकों का सेंसर-आधारित पता लगाना, समुदाय-स्तरीय जल कीटाणुशोधन तकनीकें, और मौसमी सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम की पहचान के लिए जल जीवन मिशन के जल गुणवत्ता डेटा का उपयोग शामिल था। प्रस्तुतियों में सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत निगरानी, उपयुक्त प्रौद्योगिकियों और डेटा-संचालित दृष्टिकोणों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
पांचवां तकनीकी सत्र, "वित्त पोषण, आर्थिक मॉडल और तकनीकी-आर्थिक समाधान," वॉश सेवाओं की वित्तीय, तकनीकी और आर्थिक स्थिरता में सुधार के दृष्टिकोणों पर केंद्रित था। चार शोध पत्रों में लागत प्रभावी जल सुरक्षा समाधान के रूप में टैबलेट-आधारित इनलाइन क्लोरीनीकरण, नदी के पानी के निस्पंदन और गुणवत्ता मूल्यांकन के लिए टिकाऊ दृष्टिकोण, ग्रामीण वॉश और सामुदायिक स्थिरता के लिए नवीन आर्थिक मॉडल, और ग्रामीण गुजरात में गोवर्धन घटक का सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन शामिल था। इस सत्र में टिकाऊ जल और स्वच्छता सेवाओं का समर्थन करने में लागत प्रभावी प्रौद्योगिकियों, नवीन आर्थिक मॉडल और स्थानीय क्षमता निर्माण की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
छठा तकनीकी सत्र, "शासन, सामुदायिक सहभागिता और संस्थागत सुदृढ़ीकरण," वॉश सेवा वितरण में सामुदायिक सहभागिता, स्थानीय शासन और लचीलेपन पर केंद्रित था। चार शोध पत्रों में राजस्थान में एसडीजी 6 को प्राप्त करने में सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक शासन, पंजाब के ग्रामीण होशियारपुर में स्वच्छ भारत मिशन के प्रदर्शन, बाढ़-लचीली वॉश प्रणालियों के लिए संस्थागत जुड़ाव को मजबूत करने के दृष्टिकोण, और हिमाचल प्रदेश के पीईएसए क्षेत्रों में ग्रामीण जल स्रोतों के जलवायु लचीलेपन का परीक्षण किया गया। प्रस्तुतियों में टिकाऊ और जलवायु-लचीली वॉश प्रणालियों को मजबूत करने में सामुदायिक भागीदारी, संस्थागत जुड़ाव और स्थानीय स्तर पर उत्तरदायी दृष्टिकोणों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
चर्चा उद्घाटन के दिन के उच्च-स्तरीय विषयों से आगे बढ़कर जल शासन और समानता, प्रौद्योगिकी को अपनाना और दक्षता, जलवायु जोखिम, उपचारित अपशिष्ट जल के रीयूज और समुदाय-नेतृत्व वाले रिचार्ज को शामिल करते हुए विस्तृत, क्षेत्र-विशिष्ट कार्यों की ओर बढ़ गई। थिमैटिक फोरम ने मंच के सात उप-विषयों में से पहले तीन पर अपने शोध पत्रों की प्रस्तुतियाँ शुरू कीं। ये सत्र सम्मेलन की कार्यवाही में संकलित शॉर्टलिस्ट किए गए शोध पत्रों पर आधारित थे।
कंट्री फोरम (सीएफ)
जल सुरक्षा में प्रौद्योगिकी-संचालित पहलों को साझा करने पर केंद्रित सीएफ-2, जिसका विषय "भारत में टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए जर्मन और यूरोपीय संघ के समाधान" था, की अध्यक्षता नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में आर्थिक सहयोग और विकास के प्रमुख श्री गॉटफ्रीड वॉन गेम्मिंजेन ने की, जिसमें जीआईजेड, सीमेंस, वाटरशेड मॉनिटरिंग इंक, असोती इंजीनियरिंग, ह्यूबर एनवायरोटेक और निवुस टेक्नोलॉजीज ने जल सुरक्षा के लिए डिजिटल और सटीक प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की।
जल प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और स्रोत स्थिरता में देशों की सफलता की कहानियों पर नीदरलैंड और सीईईडब्लू के साथ आयोजित सीएफ-3 की सह-अध्यक्षता नीदरलैंड सरकार के बुनियादी ढांचा और जल प्रबंधन मंत्रालय में जल और मृदा मामलों के उप-मंत्री श्री जाप स्लोटमेकर और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीना, आईएएस ने की, जिसमें सर्कुलर वाटर इकॉनमी, जलवायु-लचीली कृषि और ज्ञान के हस्तांतरण पर चर्चा हुई।
वाटर लीडर्स फोरम (डब्लूएलएफ)
महाराष्ट्र और विश्व बैंक, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड; आईडब्लूएमआई; डेवलपमेंट सपोर्ट सेंटर, अहमदाबाद और पानी फाउंडेशन, महाराष्ट्र के साथ आयोजित "समावेशी जल प्रबंधन के लिए साझेदारी और सहयोग" पर केंद्रित डब्लूएलएफ-1 की अध्यक्षता महाराष्ट्र के डब्लूआरडी, (सीएडी) के सचिव डॉ. संजय बेलसरे ने की और सह-अध्यक्षता विश्व बैंक के वरिष्ठ जल संसाधन प्रबंधन विशेषज्ञ श्री अजित राधाकृष्णन ने की। इसमें भारत के कृषि-जलवायु क्षेत्रों में जल तक पहुंच, गुणवत्ता और लचीलेपन के लिए साझेदारी मॉडल पर चर्चा की गई।
फिक्की के साथ आयोजित "कुशल जल उपयोग के लिए तकनीकी समाधान" पर केंद्रित डब्लूएलएफ-2 की अध्यक्षता फिक्की वाटर मिशन की अध्यक्ष श्रीमती नैना लाल किदवई ने की और सह-अध्यक्षता संयुक्त सचिव एवं केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री प्रदीप कुमार अग्रवाल ने की। यह सत्र स्मार्ट सिंचाई, डिजिटल जल प्रबंधन, रिसाव का पता लगाने और औद्योगिक जल दक्षता पर केंद्रित था।
प्रैक्टिसनर्स फोरम (पीएफ)
"जल प्रबंधन में राज्य की पहल" पर केंद्रित पीएफ-1 की अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के पूर्व सदस्य श्री भोपाल सिंह ने की, जिसमें एनआरसीडी के संयुक्त सचिव श्री जैगाम अली खान सह-अध्यक्ष रहे। इस सत्र में डब्लूआरडी, महाराष्ट्र, ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन, एनईआईडीए, डब्लूआरडी, मध्य प्रदेश और डब्लूआरडी, हरियाणा के अधिकारी व प्रतिनिधि एक साथ आए और संरक्षण तथा सेवा वितरण में राज्य-स्तरीय हस्तक्षेपों पर चर्चा की।
"जल-बचत और जलवायु-स्मार्ट तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाना: राज्यों से सीख" पर केंद्रित पीएफ-2 की अध्यक्षता महाराष्ट्र के डब्लूआरडी के प्रमुख सचिव श्री एकनाथ डावलेज, आईएएस ने की, और राष्ट्रीय जल मिशन के संयुक्त सचिव श्री सुमंत नारायण इसके सह-अध्यक्ष रहे। इस सत्र में महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक और गुजरात में सूक्ष्म सिंचाई, सौर पंप और डिजिटल मैपिंग पर चर्चा की गई।
पेयजल और स्वच्छता विभाग के साथ आयोजित "ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रभावी ग्रेवाटर प्रबंधन" पर केंद्रित पीएफ-3 की अध्यक्षता जेएस एवं एमडी, एसबीएम(जी), डीडीडब्लूएस श्रीमती ऐश्वर्या सिंह ने की, तथा सह-अध्यक्षता त्रिपुरा सरकार के पीडब्लूडी सचिव श्री बृजेश पांडे ने की। 3आर (रिड्यूस, रीचार्ज और रीज्यूज़) दृष्टिकोण पर आधारित इस सत्र में बताया गया कि अब लगभग 5.46 लाख गाँवों में ग्रेवाटर प्रबंधन की व्यवस्था है; इस पैनल में एसबीएम (जी) के मिशन निदेशकों के साथ-साथ जमीनी स्तर के स्वच्छताग्राहियों और सरपंचों ने भी हिस्सा लिया।
"स्मार्ट सिंचाई प्रबंधन" पर केंद्रित पीएफ-4 की अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के सदस्य (डब्लूपी एंड पी) श्री योगेश पैथानकर ने की, और सह-अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के मुख्य अभियंता, यूजीबीओ श्री राजीव कुमार ने की। पैनलिस्टों ने आईडब्लूएमआई और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ मिलकर सिंचाई में रिमोट सेंसिंग, आईओटी एवं एआई पर चर्चा की।
थिमैटिक फोरम (टीएफ)
दिन भर चले आठ थिमैटिक फोरम सत्रों में शॉर्टलिस्ट किए गए शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें मंच के सात उप-विषयों में से पहले तीन उप-विषयों को शामिल किया गया।
उप-विषय 1, समावेशी और न्यायसंगत जल शासन: सभी क्षेत्रों में जल आंटन और पहुंच पर केंद्रित टीएफ-1 की अध्यक्षता सीडब्लूसी के पूर्व अध्यक्ष श्री एस. मसूद हुसैन ने की, और सह-अध्यक्षता सीडब्लूएमए के सदस्य श्री विनीत गुप्ता ने की; जल शासन के सिद्धांत: संकेतक, ऑडिट और मानक पर केंद्रित टीएफ-2 की अध्यक्षता आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर ऑफ़ प्रैक्टिस श्री बी.आर.के. पिल्लई ने की, तथा सह-अध्यक्षता कर्नाटक सरकार के उन्नत एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन केंद्र के निदेशक (तकनीकी) डॉ. पी. सोमशेखर राव ने की; और संस्थागत सुधार और सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित टीएफ-3 की अध्यक्षता सीडब्लूसी के सदस्य (डब्लूपी एंड पी) श्री योगेश पैथानकर ने की, जिसमें सीडब्लूसी के मुख्य अभियंता (आईएमओ) श्री आशीष बनर्जी सह-अध्यक्ष रहे। शोध पत्रों में समता-आधारित भूजल आंटन, जल शासन में महिलाओं की भागीदारी और 'सोलर दीदी' स्वंय-सहायता समूह मॉडल, सिंचाई परियोजनाओं के जल ऑडिट और बेंचमार्किंग, तथा नदी शासन पर संसदीय चर्चा का परीक्षण किया गया।
उप-विषय 2, जल संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए सहयोग: विभिन्न क्षेत्रों में उपचारित अपशिष्ट जल के रीयूज पर केंद्रित टीएफ-4 की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के सदस्य (थर्मल) श्री प्रवीण गुप्ता ने की, जिसमें एनएमसीजी के उप महानिदेशक श्री नलिन कुमार श्रीवास्तव सह-अध्यक्ष रहे। कुशल जल प्रबंधन के लिए बहु-हितधारक साझेदारी पर केंद्रित टीएफ-5 की अध्यक्षता सीडब्लूएमए के अध्यक्ष श्री एस.के. हलधर ने की, जिसमें भारत और बांग्लादेश के लिए आईडब्लूएमआई के कंट्री प्रतिनिधि श्री गोपाल कुमार सह-अध्यक्ष रहे; और जलवायु-संबंधित जोखिम के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित टीएफ-6 की अध्यक्षता जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग के प्रोफेसर डॉ. दीपक खरे ने की, तथा सह-अध्यक्षता राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की के वैज्ञानिक-ई डॉ. मनीष कुमार नेमा ने की। शोध पत्रों में अपशिष्ट जल में सर्कुलर इकॉनमी, जल-संवेदनशील शहर, केन-बेतावा लिंक में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियां, और सूखे तथा बाढ़ जोखिम मूल्यांकन शामिल थे, जिसमें केरल में जलवायु लचीलापन के लिए बेसिन-आधारित दृष्टिकोण भी शामिल था।
उप-विषय 3, जल सुरक्षा के लिए प्रौद्योगिकी और समुदाय: जल सुरक्षा के लिए पूर्वानुमान और मॉडलिंग पर टीएफ-7 की अध्यक्षता आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. ए. के. गोसाइन ने की और इसकी सह-अध्यक्षता सेटस कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं सीईओ डॉ. अजय प्रधान ने की। वहीं, भूजल रिचार्ज में सामुदायिक सहभागिता पर टीएफ-8 की अध्यक्षता मेघालय सरकार के डब्लूआरडी के आयुक्त एवं सचिव श्री सिरिल वी. डार्लोंग डिएंगडोह ने की और इसकी सह-अध्यक्षता मानव रचना विश्वविद्यालय के उन्नत जल प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन केंद्र के अध्यक्ष प्रोफेसर तथा वाटर फॉर पीपल के बोर्ड अध्यक्ष डॉ. दीपांकर साहा ने की। टीएफ-7 में जल सुरक्षा के लिए एआई, मशीन लर्निंग और रिमोट सेंसिंग, एससीएडीए व जीआईएस के एकीकरण, तथा नदी संगमों पर बाढ़ मॉडलिंग जैसे विषयों पर चर्चा हुई; जबकि टीएफ-8 में समुदाय के नेतृत्व में गाद निकालने, झरने के पुनरुद्धार, प्रबंधित एक्वीफायर रिचार्ज और अटल भूजल योजना को आधार बनाया गया।
समानांतर कार्यक्रम (एसई)
भारत में जल-से-भोजन समाधानों को बढ़ावा देने पर केंद्रित एसई-1—'वित्तपोषण, साझीदारी और नवाचार के माध्यम से पीएमकेएसवाई के प्रभाव को अधिकतम करना'—का आयोजन विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्लूएमआई) द्वारा किया गया था। इसमें इस बात पर विचार किया गया कि किसानों के लिए सिंचाई के पानी का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित करने हेतु बेहतर वित्तपोषण, मजबूत साझीदारी और नए नवाचारों के माध्यम से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाइयों योजना को कैसे और सुदृढ़ किया जा सकता है। इस सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं संयुक्त सचिव श्री प्रदीप कुमार अग्रवाल ने की, और इसमें विश्व बैंक के जल विभाग के वैश्विक निदेशक श्री सरोज झा की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने कृषि के लिए जल सुरक्षा के वित्तपोषण पर एक वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
जीएसडीपी कन्वर्सेशन सीरीज़ पर आधारित एसई-2—'भारत-जर्मन सहयोग के माध्यम से भारत के वाटर विजन 2047 को गति देना' का आयोजन जर्मन दूतावास द्वारा किया गया था। इस सत्र में इस बात पर विचार किया गया कि भारत-जर्मनी की साझेदारी भारत के दीर्घकालिक जल विजन 2047 को जमीन पर व्यावहारिक कार्रवाई में बदलने में कैसे मदद कर सकती है।
नई दिल्ली स्थित जर्मन संघीय गणराज्य के महामहिम राजदूत जैस्पर वीक ने उद्घाटन भाषण दिया। इस सत्र में जल शक्ति राज्य मंत्री माननीय श्री राज भूषण चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति भी रही, जिन्होंने मुख्य भाषण दिया।
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